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धमतरी

धमतरी धान ख़रीदी केंद्रों में रंग–तिरपाल–सुतली का बड़ा खेल……!

जहाँ नेताजी की एंट्री— सेटिंग सप्लाई….नियम हो गई दरकिनार…..!

धमतरी।धान खरीदी सीजन के साथ-साथ जिले के कई क्षेत्रों में एक और ‘मौसम’ सक्रिय हो गया है—
बिना निविदा के सप्लाई कराने का मौसम।
और इस बार चर्चा में हैं धान केंद्रों में लगने वाले रंग, तिरपाल, सुतली, रस्सी और अन्य सामग्री।

हर साल यह सामान देने वाले स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, वे वर्षों से नियमों के तहत सप्लाई करते आए हैं।
लेकिन इस बार खेल पलट गया है।

जहाँ नेता जी का नेटवर्क सक्रिय— वहाँ सीधी सप्लाई निविदा बाद में

कई धान खरीदी केंद्रों में शिकायत है कि एक कथित युवा नेता के प्रभाव में:

न कोटेशन मंगाए गए

न निविदा जारी हुई

और न ही दर तुलना की गई

सीधा एक ही सप्लायर को बुलाकर रंग–तिरपाल–सुतली की सप्लाई करा दी गई, जैसे पूरा सरकारी तंत्र उसी के भरोसे चलता हो।

व्यापारी कलेक्टर और सहायक पंजीयक तक पहुँचे—

लेकिन… असर ZERO!

 

स्थानीय व्यापारियों को दरकिनार किया गया

जिस व्यापारियों ने सालों से धान केंद्रों में उत्तम क्वालिटी का सामान दिया,
जिसके रेट हमेशा प्रतिस्पर्धी रहे,
जिसकी सप्लाई समय पर और विश्वसनीय थी—

उन्हें इस बार पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।

व्यापारी पूछ रहे हैं—
“अगर हमने फॉर्म भरे, कोटेशन दिया, तो फिर उसे खोला क्यों नहीं गया?”

➡ दो तस्वीरें सामने आई हैं

1️⃣ जहाँ नेता जी का प्रभाव नहीं — वहाँ नियम का पालन

इन केंद्रों में बाकायदा कोटेशन, निविदा आधारित चयन हुआ।

2️⃣ जहाँ नेता जी की दखल — वहाँ नियमों की बली

न कोई खरीद प्रक्रिया,
न कोई पारदर्शिता,
बस सेटिंग और सीधी सप्लाई!

समिति को घाटा, सप्लायर को फायदा?

जानकारों का दावा है कि बिना प्रतियोगी प्रक्रिया के सप्लाई होने से:

समिति को आर्थिक नुकसान

गुणवत्ता पर सवाल

और पारदर्शिता की कब्र खुद गई है।

कई स्थानों पर सामान की कीमतें सामान्य बाजार दर से अधिक बताई जा रही हैं,
जिससे यह साफ झलकता है कि खेल सिर्फ सप्लाई का नहीं…
बल्कि रेट–गेम का भी है।

सबसे बड़ा सवाल—

क्या नेताओं का दबाव सरकारी खरीद व्यवस्था से ऊपर है?
और
क्या धान केंद्रों में सामग्री सप्लाई का काम निजी व्यापार में बदल चुका है?

** यह तो बस Part 1 है…*

Part 2 में असली धमाका होगा!

आगे आएगा—
✔ किन केंद्रों में क्या–क्या खरीदा गया
✔ किस दर पर सप्लाई हुई
✔ कितना नुकसान हुआ
✔ कौन–कौन शामिल है नेटवर्क में
✔ और कैसे हर साल सप्लाई करने वाले स्थानीय व्यापारियों को अलग कर दिया गया…..

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