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धमतरी ने खोया हास्य-व्यंग्य का उज्ज्वल सितारा – कवि श्री सुरजीत नवदीप नहीं रहे

धमतरी/साहित्यिक जगत आज गहरे शोक में है। अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों के लोकप्रिय हास्य-व्यंग्य कवि, कुशल मंच संचालक और धमतरी जिला हिंदी साहित्य समिति के संरक्षक श्री सुरजीत नवदीप अब हमारे बीच नहीं रहे। कल रात्रि 9 बजे नगर के उपाध्याय नर्सिंग होम में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।

जन्म और शिक्षा
1 जुलाई 1937 को मंडी भवलदीन, पंजाब (वर्तमान पाकिस्तान) में जन्मे श्री नवदीप ने एम.ए. (हिंदी), बी.एड. और सी.पी.एड. की उपाधियां प्राप्त कीं। दीर्घकालीन शिक्षा सेवा के बाद वे स्वतंत्र लेखन और साहित्य साधना में सक्रिय रहे।

साहित्यिक योगदान
हिंदी हास्य-व्यंग्य की दुनिया में श्री नवदीप का नाम आदर और सम्मान से लिया जाता है। उनकी कलम ने समाज की जटिलताओं, विसंगतियों और राजनीतिक व्यंग्य को सहज हास्य शैली में अभिव्यक्ति दी।
उनकी चर्चित कृतियों में लाजवंती का पौधा (उपन्यास), हवाओं में भटकते हाथ, कुर्सी के चक्कर में, शब्दों का अलाव, आंसू हंसते हैं, रावण कब मरेगा?, खाओ पीयो खिसको, बुढ़ापा जिन्दाबाद जैसी काव्य कृतियां शामिल हैं।

सम्मान और पहचान
श्री नवदीप को छत्तीसगढ़ और देशभर की अनेक साहित्यिक-सामाजिक संस्थाओं ने सम्मानित किया। वे छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के सदस्य भी रहे। रेडियो और दूरदर्शन से लेकर अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों के मंच तक उन्होंने अपनी उपस्थिति से साहित्य प्रेमियों का दिल जीता लिया।

इंडियन जागरण परिवार दिवंगत कवि को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

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