धमतरी/शनिवार को जिला अस्पताल का माहौल बेहद भावुक हो गया, जब वर्षों से अस्पताल की रीढ़ बने डॉक्टर संजय वानखेडे को सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। अपने सादगीपूर्ण स्वभाव और मरीजों के प्रति अपनापन भरे व्यवहार से उन्होंने न केवल अस्पताल को संभाले रखा बल्कि हजारों मरीजों को जीवन देने में अहम भूमिका निभाई।
डॉक्टरों की कमी जैसे कठिन हालातों में भी डॉ. वानखेडे ने कभी हार नहीं मानी। दिन-रात मरीजों की सेवा में जुटे रहकर उन्होंने यह साबित किया कि सच्ची सेवा भावना ही असली ताकत है। यही कारण है कि आज जिला अस्पताल का हर कर्मचारी, अधिकारी और मरीज उनके योगदान को याद कर गर्व महसूस कर रहा है।
विदाई समारोह में डॉक्टर वानखेडे ने भावुक होकर कहा— “जिला अस्पताल मेरी कर्मभूमि रहा है। यहां का हर मरीज और हर साथी मेरे जीवन का हिस्सा रहा है। जो प्यार और सम्मान मुझे यहां मिला, वह मेरी सबसे बड़ी पूंजी है।”
अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारी एवं स्टाफ ने ने उन्हें याद करते हुए कहा कि उनका व्यवहार हमेशा सहज और हमदर्दी से भरा रहा। मरीजों को वे परिवार की तरह देखते थे। उनके मार्गदर्शन और सेवा भाव ने अस्पताल को मजबूती दी और लोगों में विश्वास जगाया।उनके रिटायरमेंट के बाद अस्पताल में भले ही एक खालीपन महसूस होगा, लेकिन उनकी कार्यशैली और सेवा की मिसाल आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

