धमतरी/गंगरेल बांध डुबान क्षेत्र के हजारों मछुआ परिवारों के चेहरों पर फिर से मुस्कान लौट आई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील पहल पर वर्ष 2023 में किए गए गंगरेल जलाशय के अनुबंध को निरस्त कर दिया गया है। इसके बाद अब 1200 से अधिक परिवारों को रॉयल्टी आधार पर मत्स्याखेट का अधिकार मिल गया है। इस फैसले से लंबे समय से रोज़गार संकट झेल रहे मछुआ समुदाय को सीधी राहत मिली है।

मुख्यमंत्री निवास में पहुंची गंगरेल डुबान क्षेत्र की 11 सहकारी समितियों ने मुख्यमंत्री साय का आभार जताया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि मछुआ परिवारों की आजीविका उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने डुबान क्षेत्र में जनसुविधाओं को देखते हुए शीघ्र ही एक एम्बुलेंस और राष्ट्रीय बैंक की शाखा शुरू करने की भी घोषणा की।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में गंगरेल जलाशय को निजी ठेकेदार को नीलामी के माध्यम से 1.16 करोड़ रुपये वार्षिक पर दिया गया था। इससे पहले यह जलाशय मछुआ सहकारी समितियों को लीज पर मिलता रहा था, जिससे हजारों परिवारों की रोज़ी-रोटी चलती थी। लेकिन नीलामी व्यवस्था से मछुआरों की आमदनी पर गहरा असर पड़ा और उनकी आजीविका संकट में आ गई। लगातार मांग और संघर्ष के बाद मुख्यमंत्री की पहल पर 08 अगस्त 2025 को अनुबंध निरस्त कर समितियों को फिर से मत्स्याखेट का अधिकार दे दिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन जल्द ही मत्स्यपालन की नई नीति में संशोधन कर पूर्ववत समितियों को लीज व्यवस्था बहाल करेगा। इस अवसर पर धमतरी महापौर रामू रोहरा, पूर्व महिला आयोग अध्यक्ष हर्षिता पांडे सहित बड़ी संख्या में मछुआ परिवार व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
