धमतरी दौरे पर आए संसदीय क्षेत्र के सांसद भोजराज नाग का एक बयान इन दिनों चर्चा में है। पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल—“अधिकारी फोन नहीं उठाते, इस पर क्या कहेंगे?”—के जवाब में सांसद ने हँसी-मजाक में चुटकी लेते हुए कहा,
“जो अधिकारी फोन नहीं उठाते, उनके नाम से नींबू काट दिए जाएंगे!”
सांसद के इस बयान पर वहां मौजूद स्थानीय नेता एवं पत्रकारों में हल्की हंसी जरूर छिड़ी, लेकिन इसके पीछे छुपा मुद्दा काफी गंभीर माना जा रहा है। क्षेत्रीय विकास, जनसमस्याओं के निराकरण और प्रशासनिक तालमेल के लिए पत्रकारों एवं आम नागरिकों से अधिकारियों के बीच समय पर संवाद होना बेहद जरूरी है।
फोन नहीं उठाना बन रहा बड़ी समस्या
कई बार पत्रकारों की ओर से की गई कॉल्स का जवाब न मिलना सिर्फ ‘कम्युनिकेशन गैप’ नहीं, बल्कि कार्यप्रणाली में ढिलाई का संकेत भी माना जाता है। खासकर जब जनता की समस्या लेकर अधिकारी से संपर्क करते हैं, तो तत्काल रिस्पॉन्स की अपेक्षा स्वाभाविक है।
बात भले मजाक में कही गई हो, लेकिन संदेश साफ है—
“अधिकारी फोन उठाएं, जनता की सुनें, और जिम्मेदारी निभाएं… वरना अब नींबू भी कट सकता है!”
