जगह को लेकर सस्पेंस बरकरार गाइडलाइन की पूर्ति होने वाले स्थान को मिलेगी प्राथमिकता!
धमतरी/छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रदेश का दूसरा सैनिक स्कूल अब धमतरी जिले में खोलने की तैयारी शुरू हो चुकी है। अभी तक राज्य में केवल एक ही सैनिक स्कूल – सैनिक स्कूल अंबिकापुर – संचालित है, और अब धमतरी को यह गौरव मिलने जा रहा है।
लेकिन इस बड़ी खुशखबरी के साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है — आख़िर यह सैनिक स्कूल धमतरी शहर के आसपास में बनेगा या कुरूद में?
हरी झंडी, बढ़ी हलचल
आयुक्त लोक शिक्षण ने 13 फरवरी को भेजे गए प्रस्ताव पर अपनी औपचारिक सहमति दे दी है। कलेक्टर धमतरी द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भेजा गया था, जिसमें स्कूल भवन के लिए भूमि उपलब्ध कराने की बात भी शामिल थी।
DPI ने इस संबंध में सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर मंजूरी प्रदान कर दी है।
सरकारी प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है, लेकिन ज़मीन की सटीक लोकेशन को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है।
धमतरी या कुरूद? नागरिकों में संशय बरकरार!
जिले में चर्चा जोरों पर है। कुछ सूत्रों का कहना है कि स्कूल धमतरी मुख्यालय में स्थापित हो सकता है, जबकि कई लोगों का दावा है कि कुरूद क्षेत्र में भूमि की उपलब्धता अधिक उपयुक्त है।
इसी असमंजस के कारण लोगों में उत्सुकता और हलचल दोनों बढ़ गई हैं। फैसला जो भी हो, पूरे जिले की निगाहें अब शासन के अगले आदेश पर टिकी हैं।
बच्चों के सपनों को लगेगी वर्दी की उड़ान
नए सैनिक स्कूल की स्थापना से धमतरी सहित आसपास के जिलों के विद्यार्थियों को सैन्य अनुशासन, आधुनिक शिक्षा और राष्ट्रीय स्तर की तैयारी का अवसर मिलेगा।
यह स्कूल न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देगा, बल्कि युवाओं को NDA, CDS और अन्य रक्षा सेवाओं में जाने के लिए मजबूत आधार भी प्रदान करेगा।
अब गांव-गांव से निकलेंगे वर्दीधारी सपने, और जिले के युवा सीधे देश सेवा की राह पर कदम बढ़ा सकेंगे।
रोजगार और विकास की नई इबारत सैनिक स्कूल की स्थापना से स्थानीय स्तर पर शिक्षकों, स्टाफ और अन्य सेवाओं में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही आसपास के क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।
धमतरी जिला अब सिर्फ कृषि और व्यापार के लिए नहीं, बल्कि सैन्य शिक्षा के मानचित्र पर भी अपनी अलग पहचान बनाने की ओर अग्रसर है।
अब सबकी जुबान पर एक ही सवाल…
“सैनिक स्कूल तो तय है… पर बनेगा कहां?”
जब तक शासन अंतिम स्थल की घोषणा नहीं करता, तब तक धमतरी और कुरूद के बीच यह रोमांच बना रहेगा।
एक बात तय है —
जिस भी धरती पर यह सैनिक स्कूल बनेगा, वहां से देश सेवा का नया इतिहास लिखा जाएगा।
