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धमतरी

जहां से चलता है जिले का प्रशासन, वहीं टूटी सड़कें दे रही हैं बेबसी का सबूत!

धमतरी/ शहर की पहचान समझे जाने वाला कलेक्टर परिसर, जहां से रोजाना कलेक्टर, एसपी सहित जिले के तमाम उच्च अधिकारी आते-जाते हैं,वही जिले के मंत्री,जनप्रतिनिधियों का  आना जाना भी होता है उसके बाद भी गड्ढे के अंदर सड़क है।वहां की स्थिति इतनी दयनीय है कि लोग दंग रह जाते हैं। जगह-जगह गड्ढों से भरी सड़कें, बरसात के पानी का जमाव और उखड़ी हुई डामर यह दर्शाने के लिए काफी है कि प्रशासन अपनी ही आंखों के सामने हो रही समस्याओं को क्यों नजरअंदाज कर रहा है?

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इसी मार्ग से अधिकारी रोज निकलते हैं, बैठकों में विकास की लंबी-चौड़ी बातें होती हैं, लेकिन अपने ही दफ्तर के सामने की दुर्दशा पर किसी की नजर नहीं पड़ती। जब प्रशासन का “मुख्यालय” ही गड्ढों से पट जाए, तो आम जनता के वार्डों और मोहल्लों की हालत का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

लोगों का कहना है कि कलेक्टर परिसर में आने-जाने वाले अधिकारी अगर चाहें, तो कुछ ही दिनों में यहां सड़क सुधार कार्य हो सकता है। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अपनी गाड़ी के शीशे चढ़ाकर निकल जाते हैं और जनता परेशानियों का बोझ झेलती रहती है।

धमतरी जैसे प्रगतिशील शहर में यह स्थिति निश्चित ही शर्मनाक है। नागरिकों का सवाल है कि जब “प्रशासन की नाक के नीचे” ही समस्याओं का अंबार है, तो बाकी क्षेत्रों के प्रति गंभीरता कितनी होगी? बरसों से चले आ रहे वादे और प्रस्ताव फाइलों तक ही सीमित हैं। गड्ढों से जूझती यह सड़कें प्रशासन की “जागरूकता” और “संवेदनशीलता” की पोल खोल रही हैं।

धमतरी की जनता यह संदेश देना चाहती है कि अब “कागजी योजनाओं” से काम नहीं चलेगा, जमीनी हकीकत सुधारनी होगी। कलेक्टर परिसर की टूटी सड़कें सिर्फ एक रास्ता नहीं, बल्कि प्रशासन की निष्क्रियता का आईना बन चुकी हैं।

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