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आस्था

समुद्र मंथन की कथा सुनने आमापारा में उमडे़ श्रद्धालु

धमतरी/आमापारा में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के पांचवें दिन शुक्रवार को कथा वाचिका पलक दुबे ने गजग्रह युद्ध, समुद्र मंथन, वामन अवतार और कृष्ण जन्म की कथा सुनाई। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमडे़।

कथा सुनाते हुए पलक दुबे ने बताया कि समुद्र मंथन की कथा के अनुसार दुर्वासा ऋषि के श्राप से वैभवहीन हुए देवताओं ने भगवान विष्णु के कहने पर असुरों के साथ मिलकर क्षीर सागर का मंथन किया, जिसमें मंदाचल पर्वत को मथनी और वासुकी नाग को रस्सी बनाया गया। इस मंथन से अमृत सहित 14 रत्न निकले, लेकिन अमृत के लिए देवताओं और असुरों में विवाद हो गया। इसके बाद भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण कर देवताओं को अमृत पिलाया और असुरों को छल से हराया। सावन के महीने में यह समुद्र मंथन हुआ था। समुद्र मंथन से निकला विष बेहद तीव्र था, जिसकी वजह महादेव के कंठ में जलन होने लगी और उनका कंठ नीला पड़ गया है, जिसकी वजह भगवान शिव को नीलकंठ के नाम से जाना गया।

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