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धमतरी

धान खरीदी के पहले दिन से किसान परेशान — हड़ताल और व्यवस्था की कमी से उपार्जन केंद्रों में अफरा-तफरी

धमतरी। प्रदेश में धान खरीदी का बहुप्रतीक्षित पर्व 15 नवंबर से शुरू तो हो गया, लेकिन धमतरी में पहले ही दिन प्रशासनिक अव्यवस्था और कर्मचारियों की हड़ताल के कारण कई उपार्जन केंद्रों पर हालात बिगड़ गए। सहकारी समिति कर्मचारियों एवं ऑपरेटर संघ की हड़ताल जारी रहने से इस बार कृषि और राजस्व विभाग के अधिकारियों को खरीदी की जिम्मेदारी दी गई है, हालांकि वे भी इसका विरोध कर रहे थे। इसके बावजूद सरकार ने इसे आवश्यक सेवा घोषित कर खरीदी शुरू करने का आदेश जारी किया।

शुक्रवार शाम रायपुर में हुई मंत्रिमंडल बैठक में धान खरीदी से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर ESMA लगाने का फैसला लिया गया। इधर धमतरी में कुछ हड़ताली कर्मचारियों के वापस लौटने की खबर भी सामने आई है। इस बीच सहकारी समिति कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष धमतरी के नरेंद्र साहू को बर्खास्त भी कर दिया गया है, जिससे कर्मचारी संगठनों में और नाराजगी बढ़ गई है।

शंकरदाह सोसायटी में न्यूज लिखते तक औपचारिक पूजा भी नहीं किया गया था….

केंद्रों पर अधिकारी नहीं, किसान लाइन में
जिले के कई उपार्जन केंद्रों में 15 नवंबर की सुबह से ही किसान ट्रैक्टरों में धान भरकर पहुंच गए थे। किसानों के पास 15 नवंबर के टोकन भी थे, लेकिन सुबह 10 बजे तक खरीदी शुरू करने के लिए कोई अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं थे। किसानों ने बताया कि केंद्रों में करीब 7–8 ट्रैक्टर धान से भरे खड़े रहे, लेकिन उन्हें धान उतारने से मना किया गया। कुछ जिम्मेदार व्यक्ति अपने जोखिम पर धान उतारने की बात कहते दिखे, पर आधिकारिक निर्देश न होने से स्थिति उलझती चली गई।

किसानों का कहना है कि वे कई किलोमीटर दूर से धान लेकर आए हैं। यदि तुरंत खरीदी या उतराई की प्रक्रिया शुरू नहीं होती, तो उन्हें गाड़ी का अतिरिक्त भाड़ा, समय की बर्बादी, और धान खराब होने का खतरा झेलना पड़ेगा। पहले वर्षों में खरीदी के पहले दिन ही प्रक्रिया सुचारू रहती थी, लेकिन इस बार व्यवस्था चरमराई हुई नजर आई।

सोमवार से पूर्णकालिक खरीदी
सूत्रों के अनुसार, आज शनिवार होने के कारण कुछ औपचारिकताएं और शुरुआती व्यवस्था में देरी होगी, लेकिन 17 नवंबर सोमवार से पूर्णकालिक खरीदी शुरू होने की संभावना जताई गई है।

कुल मिलाकर, धान खरीदी का पहला दिन किसानों के लिए भारी अव्यवस्था, कर्मचारियों की कमी और प्रशासनिक भ्रम का दिन बनकर रहा। किसान अब उम्मीद लगाए बैठे हैं कि आने वाले दिनों में खरीदी व्यवस्था पटरी पर लौटेगी।

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