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गणतंत्र दिवस : संविधान की शक्ति से मजबूत हुआ भारत, लोकतंत्र की मिसाल बना देश

📰 इंडियन जागरण | विशेष लेख

भारत 26 जनवरी को अपना गणतंत्र दिवस मना रहा है। यह दिन देश के इतिहास में उस स्वर्णिम अध्याय की याद दिलाता है, जब 1950 में भारतीय संविधान लागू हुआ और भारत ने स्वयं को एक लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित किया। आजादी के बाद यही वह क्षण था, जिसने देश को स्थिरता, दिशा और एक सशक्त पहचान दी।

गणतंत्र दिवस केवल एक राष्ट्रीय तिथि नहीं, बल्कि भारत की आत्मा से जुड़ा वह प्रतीक है, जिसने विविधताओं से भरे इस देश को एकता के सूत्र में पिरोया। भाषा, धर्म, संस्कृति और परंपराओं में भिन्नता के बावजूद संविधान ने सभी नागरिकों को समान अधिकार देकर लोकतंत्र को मजबूत आधार प्रदान किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय संविधान विश्व का सबसे विस्तृत और सशक्त संविधान है, जो हर वर्ग को न्याय, स्वतंत्रता और समान अवसर की गारंटी देता है। यही कारण है कि भारत आज दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।

बीते वर्षों में देश ने विकास, विज्ञान, तकनीक, शिक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती ताकत इस बात का प्रमाण है कि मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों ने राष्ट्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। हालांकि, गणतंत्र दिवस केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर भी है। यह दिन नागरिकों को याद दिलाता है कि अधिकारों के साथ कर्तव्यों का पालन भी उतना ही आवश्यक है। सामाजिक सद्भाव, कानून का सम्मान और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना हर भारतीय की जिम्मेदारी है।

आज जरूरत है कि नई पीढ़ी संविधान की भावना को समझे और देश निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाए। जब नागरिक जागरूक और जिम्मेदार होंगे, तभी गणतंत्र की असली ताकत दिखाई देगी।

इंडियन जागरण का मानना है कि गणतंत्र दिवस हमें केवल इतिहास की याद नहीं दिलाता, बल्कि भविष्य के भारत की दिशा भी तय करता है — एक ऐसा भारत जो आत्मनिर्भर, एकजुट और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित हो।गणतंत्र का यह पर्व हर भारतीय के लिए गर्व, जिम्मेदारी और संकल्प का प्रतीक है।
जय हिंद। जय भारत।

✍️ विशेष लेख – इंडियन जागरण

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