धमतरी/नवरात्र महोत्सव में मां शीतला मंदिर धमतरी का वातावरण भक्तिभाव से सराबोर है। इस वर्ष मंदिर में 212 श्रद्धालुओं ने मनोकामना ज्योत प्रज्वलित की है। इसी कड़ी में नवरात्र के दूसरे दिन मंगलवार को धीवर समाज की ओर से विशेष धार्मिक यात्रा का आयोजन किया गया। सुबह 9 बजे महापौर रामू रोहरा ने धर्म ध्वजा दिखाकर चार बसों में सवार श्रद्धालुओं को मां मड़वारानी (चांपा-कोरबा) के लिए रवाना किया।

महापौर ने इस अवसर पर कहा कि नवरात्रि का पावन पर्व मां दुर्गा की आराधना का पर्व है। समाज द्वारा सामूहिक तीर्थयात्रा की पहल सराहनीय है। उन्होंने आगे कहा कि नवरात्रि के शुभ अवसर पर देश की जनता को जीएसटी में कटौती के रूप में सौगात मिली है। इससे महंगाई घटेगी और आमजन को खाद्यान्न समेत आवश्यक वस्तुएं सस्ती मिलेंगी।
समाज की पहल से मजबूत हो रही सामाजिक एकता
धीवर समाज के अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद जगबेड़हा एवं सचिव सोहन धीवर ने बताया कि हर साल नवरात्र और सावन महोत्सव पर समाजजन सामूहिक रूप से तीर्थयात्रा करते हैं। इससे समाज में भाईचारा और एकता मजबूत होती है। कई लोग व्यक्तिगत कारणों से यात्रा नहीं कर पाते, ऐसे में सामूहिक यात्रा से सभी वर्ग—बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक—को दर्शन का अवसर मिलता है।
इस मौके पर समाज के संरक्षक परमेश्वर फूटान, होरीलाल मत्स्यपाल, सोनूराम सपहा, शैलेन्द्र नाग, दुर्गेश रिगरी, राजू ओझा, कृष्णा हिरवानी, राजेंद्र शर्मा, पिंटू यादव, हेमंत बंजारे, कुलेश सोनी, गजेंद्र कंवर, अज्जू देशलहरे, कल्याणपुरी गोस्वामी, अर्जुन नाग, उमेश नाग, यशवंत कोसरिया, गजेश कोसरिया, पतालू नाग, एकलव्य फूटान, विनोद ओझा, सुरेश सपहा समेत बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
मां मड़वारानी की महिमा
मान्यता है कि एक राजकुमारी का विवाह तय हुआ था, लेकिन माता रानी ने विवाह मंडप (मड़वा) छोड़कर कलमी पेड़ के नीचे भगवान शिव से मिलन किया। तभी से वे “मड़वारानी” कहलाने लगीं।
मंदिर का महत्व
कहते हैं कि जब माता रानी विवाह मंडप छोड़कर आईं, तो उनके हाथ की हल्दी रास्ते में पत्थर पर गिर गई, जिससे पत्थर पीला हो गया। यह पत्थर आज भी मड़वारानी मंदिर के पास मौजूद है। मान्यता है कि माता की सहेलियाँ—आरती, भारती, मालती और शांति—भी उनके साथ थीं और वे एक पेड़ के नीचे विराजमान हैं। नवरात्र में यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।



