indianjagran.in
विशेष

धमतरी : विकास की संभावनाएँ और राजनीति की चुनौतियाँ

संपादक की कलम से

धमतरी,छत्तीसगढ़ का वह ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगर है, जिसकी पहचान सिर्फ एक जिले के रूप में नहीं, बल्कि “धान का कटोरा” कहलाने वाले प्रदेश के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में होती है। यहाँ की भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक संपदा, पर्यटन स्थल और सांस्कृतिक धरोहर इसे विकास के असीम अवसर प्रदान करते हैं। बावजूद इसके, यह जिला आज भी अपनी असली क्षमता तक नहीं पहुँच पाया। सबसे बड़ा कारण – स्थानीय राजनीति की गुटबाजी और योजनाओं का कागज़ों तक सिमट कर रह जाना।

🌾 कृषि और उद्योग का स्वर्ग, लेकिन अधूरी उड़ान

धान, दलहन, तिलहन और वनोपज की भरपूर पैदावार धमतरी को प्रदेश का धान का कटोरा बनाती है। अगर यहाँ फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स, पैकेजिंग हब और कृषि आधारित उद्योग स्थापित हों तो जिले की अर्थव्यवस्था बदल सकती है। युवाओं को रोज़गार मिलेगा और पलायन भी रुकेगा।

🏞️ पर्यटन से बदल सकती है तस्वीर

रुद्री मंदिर, सिहावा पर्वत, गंगरेल बांध और जंगल सफारी जैसे स्थल धमतरी को पर्यटन की दुनिया में नई पहचान दिला सकते हैं।
प्राकृतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संगम अगर सही ढंग से प्रचारित हो और पर्यटन ढांचे पर काम हो, तो यह क्षेत्र देश-विदेश के पर्यटकों का गढ़ बन सकता है।

🏙️ अधूरी शहरी तस्वीर

राजधानी रायपुर से महज़ 75 किलोमीटर की दूरी धमतरी को निवेश और व्यवसाय के लिए उपयुक्त बनाती है।
फिर भी स्मार्ट रोड, पार्किंग, चौपाटी, आधुनिक बस स्टैंड और मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल जैसी ज़रूरी सुविधाएँ अब भी अधूरी हैं।शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की ज़रूरत तो और भी गंभीर है।

प्रयास हुए, लेकिन अधूरे रहे
यह कहना भी गलत होगा कि नेताओं ने कोई प्रयास नहीं किया। कई बार वास्तविक कोशिशें हुईं।कुछ सड़कें बनीं,गंगरेल बांध को पर्यटन से जोड़ने की पहल हुई, अस्पतालों और कॉलेजों का विस्तार हुआ।मगर ये सब पहल उस स्तर तक नहीं पहुँच पाईं, जिसकी जिले को आवश्यकता थी। इसका कारण रहा – योजनाओं में निरंतरता की कमी और राजनीतिक विरोध।

⚖️ राजनीति और गुटबाजी की जकड़न

धमतरी की राजनीति लंबे समय से गुटबाजी की गिरफ्त में है।
एक गुट योजना लाता है, दूसरा उसे रोक देता है।
इस खींचतान का सीधा नुकसान जनता और शहर को उठाना पड़ता है। जहाँ दूसरे जिले रफ्तार पकड़ चुके हैं, वहीं धमतरी अब भी “संभावनाओं का शहर” बना हुआ है।

🔑 समाधान की राह

गुटबाजी से ऊपर उठे नेता – सामूहिक हित में काम करें।

जनभागीदारी बढ़े – जनता की सक्रियता से नेताओं पर दबाव बनेगा।

पर्यटन पर फोकस – निजी निवेश और राष्ट्रीय प्रचार जरूरी है।

उद्योग और रोजगार – कृषि आधारित उद्योग से पलायन रुकेगा।

शिक्षा और स्वास्थ्य – आधुनिक संस्थान और स्वास्थ्य सेवाएँ विकसित हों।

✨: संभावनाओं का शहर, इंतज़ार है सही दिशा का

धमतरी की मिट्टी, संसाधन और संस्कृति इसे विकास के लिए पूरी तरह तैयार करते हैं।जरूरत है सिर्फ राजनीति से ऊपर उठकर सामूहिक हित में सोचने की।यदि धमतरी ने सही दिशा में कदम बढ़ाए, तो यह आने वाले समय में सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश में एक आदर्श और प्रगतिशील शहर के रूप में चमक सकता है।

प्रदीप अग्रवाल

संपादक इंडियन जागरण

Related posts