छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित द्वारा वर्ल्ड क्लास सर्विसेज को आउटसोर्सिंग सेवाओं के लिए जारी कार्यादेश के अंतर्गत जिले में लगभग सौ वैकल्पिक कंप्यूटर ऑपरेटरों की भर्ती की गई थी। भर्ती प्रक्रिया के दौरान जारी नियम एवं शर्तों में यह स्पष्ट रूप से उल्लेखित था कि सभी वैकल्पिक कंप्यूटर ऑपरेटरों को न्यूनतम छः माह की अवधि के लिए नियुक्त किया जाएगा तथा इस अवधि के पूर्व किसी भी स्थिति में उन्हें कार्य से पृथक नहीं किया जाएगा। इतने स्पष्ट और लिखित प्रावधानों के बावजूद संबंधित कंपनी द्वारा मनमाने तरीके से मात्र 15 दिनों के भीतर ही सभी ऑपरेटरों को कार्य से हटा दिया गया, जिससे न केवल संविदा शर्तों का गंभीर उल्लंघन हुआ है बल्कि जिले के बेरोजगार युवा वर्ग के साथ भी बड़ा अन्याय हुआ है। कंपनी की इस एकतरफा और अवैध कार्रवाई से सभी ऑपरेटर मानसिक, आर्थिक एवं सामाजिक रूप से परेशान हैं और उन्हें बिना किसी कारण बताए अचानक सेवामुक्त कर दिया गया।
इसी अन्यायपूर्ण व्यवहार के विरोध में आज नगर निगम के उपनेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में सभी प्रभावित वैकल्पिक कंप्यूटर ऑपरेटर माननीय जिला कलेक्टर के समक्ष उपस्थित हुए। कलेक्टर को प्रतिनिधि मंडल द्वारा विस्तृत ज्ञापन सौंपकर पूरी घटना की जानकारी दी गई तथा बताया गया कि कंपनी ने न तो कोई नोटिस दिया और न ही कोई वैध कारण प्रस्तुत किया। प्रतिनिधि मंडल ने यह भी अवगत कराया कि सभी ऑपरेटरों ने भर्ती प्रक्रिया के तहत सभी शर्तों का पालन किया था, समय पर जॉइनिंग दी थी और निर्धारित कार्यों का निर्वहन भी शुरू कर दिया था, इसके बावजूद कंपनी द्वारा 15 दिनों के भीतर सेवाएं समाप्त कर देना पूर्णतः अनुचित, अवैधानिक एवं शोषणकारी कदम है।
ज्ञापन सौंपते समय प्रमुख रूप से गौरव साहू, दीपक यदु, अनिकेत कश्यप, मयंक साहू, चंद्रप्रकाश, शीतल बंजारे, दीपमाला रामटेके, रामरतन कंवर, नारायण साहू, मनीष साहू, रामकुमार नागवंशी, करण मेश्राम, राहुल ध्रुव, चिराग़ साहू सहित सभी सौ वैकल्पिक कंप्यूटर ऑपरेटर उपस्थित रहे। सभी ने संयुक्त रूप से कलेक्टर से निवेदन किया कि कंपनी द्वारा किए गए अनुबंध उल्लंघन की गंभीरता को देखते हुए उचित प्रशासनिक कार्रवाई की जाए, वैकल्पिक कंप्यूटर ऑपरेटरों की सेवाओं को नियम एवं शर्तों के अनुसार पुनः बहाल किया जाए और भविष्य में ऐसे प्रकरणों पर रोक लगाने हेतु सख्त निर्देश जारी किए जाएं, ताकि युवाओं के साथ इस प्रकार का अन्याय दोबारा न हो।
