धमतरी/ खूबसूरती की बातें तो खूब होती हैं, लेकिन असली तस्वीर अर्जुनी चौक से बठेना चौक तक लगे डिवाइडर के किनारे साफ दिखाई देती है। यहां कचरे का साम्राज्य इतना मजबूत है कि उसमें से एक पौधा निकलकर 3 फीट तक ऊँचे पहुंच गया है। यानी कचरा अब खुद कह रहा है अगर सफाई नहीं करोगे, तो हम ही शहर को हरा-भरा बना देंगे!

शहर की एंट्री पर आने वाले हर शख्स का स्वागत अब फूलों की खुशबू से नहीं, बल्कि कचरे की खुशबू और पौधों की ‘अद्भुत हरियाली’ से हो रहा है। इसे देख कोई भी आगंतुक समझ जाएगा कि धमतरी में सफाई व्यवस्था कितनी ‘मजबूत जड़ें’ जमा चुकी है।
स्वच्छता पखवाड़ा बनाम कचरा पखवाड़ा
गजब यह है कि शहर में इन दिनों स्वच्छता पखवाड़ा मनाया जा रहा है। प्रशाशन द्वारा भाषण, पोस्टर और फोटो खिंचवाने में पूरा जोर लगाया जा रहा है। लेकिन जरा शहर की एंट्री पर नज़र डाल लीजिए—यहीं असली ‘कचरा पखवाड़ा’ मनाया जा रहा है। ऐसा लगता है मानो प्रशासन ने यह तय कर लिया है कि ‘स्वच्छ भारत’ का नया ब्रांडिंग स्लोगन होना चाहिए—“जहां कचरा, वहीं हरियाली।”

नागरिकों का व्यंग्य
चाय की टपरियों में नागरिकों का कहना है कि शायद प्रशासन ने यह सोचा होगा “सफाई क्यों करें? कचरा ही शहर को हरा-भरा बना देगा।” तंज कसते हुए कह रहे हैं कि अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में यह इलाका ‘कचरा गार्डन’ के नाम से मशहूर हो जाएगा। यहां पौधों की लंबाई देख साफ है कि झाड़ू तो लगाई गई लेकिन कचरा अभी तक नहीं उठा?
शहर की छवि पर चोट
पहली बार धमतरी आने वाले लोगों को यह दृश्य शहर की स्वच्छता और जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली का ‘फर्स्ट इम्प्रेशन’ देता है। और सच कहें तो यह इम्प्रेशन काफी गहरा है। कोई भी यह सोचकर लौट सकता है कि जब शहर की एंट्री का यह हाल है, तो भीतर का हाल कैसा होगा।

जिम्मेदार कौन?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन आखिर इस ओर देख क्यों नहीं रहे? या फिर वे मान बैठे हैं कि कचरे से पौधे उगाना ही उनका ‘ग्रीन धमतरी मिशन’ है।

नागरिकों की उम्मीद
नागरिकों ने अपील की है कि कम से कम शहर की एंट्री को तो साफ-सुथरा रखा जाए। आखिर यही वह जगह है जो किसी भी आगंतुक पर धमतरी की पहली छाप छोड़ती है। लोगों को उम्मीद है कि स्वच्छता पखवाड़ा खत्म होने से पहले प्रशासन यहां झाड़ू जरूर लगाएगा, वरना यह कचरा–पौधे प्रशासन की ‘ग्रीन पॉलिसी’ का प्रतीक बनकर खड़े रहेंगे।
फिलहाल तो स्थिति यह है कि कचरा और पौधे मिलकर शहर की सुंदरता पर तंज कस रहे हैं और राहगीरों से कह रहे हैं—“स्वच्छता अभियान की बातें बहुत हो गईं, अब असली नज़ारा देख लो!”

